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19 January, 2017

जब नारि रो के कम करे गम मर्द रोके अश्रु सारे


जब छोड़ कर जाते बड़े तो भाग्य छोटों का संवारे।
भाई-बहन को कर प्रतिष्ठित स्वयं की वह चाह मारे।
बच्चे मनाकर पर्व नौ नौ, बाप की बखिया उघारे।
जब नारि रो के कम करे गम मर्द रोके अश्रु सारे।

17 January, 2017

हे बच्चों की माय, दंडवत करता रविकर।


रविकर यदि राशन दिया, दे वह भूख मिटाय।
यदि मकान देते बना, घर बनाय वह भाय।
घर बनाय वह भाय, भाय वह चौबिस घंटा।
किन्तु करो यदि रार, करेगी वह भी टंटा।
लल्लो चप्पो ढेर, करे हैं मर्द अधिकतर।
हे बच्चों की माय, दंडवत करता रविकर।।😂😂

16 January, 2017

हरिगीतिका छंद

हरिगीतिका छंद
नौ माह तक माँ राह ताकी आह होंठो में दफन।
दो साल तक दुद्धू पिला शिशु-लात खाई आदतन।
माँ बुद्धि विद्या पुष्टता हित नित्य नव करती जतन ।

फिर राह ताके प्रौढ़ माँ पर द्वार पर ओढ़े कफन।। 

12 January, 2017

रहता मैं औकात में, बिछा फर्श पर मैट-


तुम गुरूर में रह रही, सजा सजाया फ्लैट।
रहता मैं औकात में, बिछा फर्श पर मैट। 
बिछा फर्श पर मैट, बसा था तेरे दिल में।
रविकर आठों याम, जमाया रँग महफिल में।
रहो होश में बोल, निकाली तुम सुरूर में।
इधर होश औकात, उधर हो तुम गुरूर में।

09 January, 2017

व्यस्त वयस्क / तनाव ग्रस्त।।

देना हठ दरबान को, अहंकार कर पार्क |
छोड़ व्यस्तता कार में, फुरसत पे टिक-मार्क |
फुरसत पर टिक-मार्क, उलझने छोड़ो नीचे |
लिफ्ट करो उत्साह, भरोसा रिश्ते सींचे |
करो गैलरी पार, साँस लंबी भर लेना |
प्रिया खौलती द्वार, प्यार से झप्पी देना ||