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21 November, 2016

तू सर्व-व्यापी है मगर मैं खोजता-फिरता रहा।


तू सर्व-व्यापी है मगर मैं खोजता-फिरता रहा।

हर शब्द से तू तो परे पर नाम मैं धरता रहा ।
तू सर्व ज्ञाता किन्तु इच्छा मैं प्रकट करता रहा।
मैं पाप यह करता रहा वह कष्ट तू हरता रहा।।

doha
रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात।
एक सिरे पर ख्वाहिसें, दूजे पर औकात।।

14 November, 2016

दोहे-


सहो प्रसव-पीड़ा तनिक, पुनर्जन्म के वक्त।
मांगे मोदी धैर्य कुछ, कहाँ मांगता रक्त।।



चौथा खंभा नोचता, खुद को जब खिसियाय।
ब्लैकमेल का धन दिखे, जन गण मन मुस्काय।।



नमो कभी भी मत नमो, हों सम्मुख जब दुष्ट।
आतंकी नक्सल खफा, देशभक्त संतुष्ट।।



सही कार्यवाही हुई, गलत लोग गमगीन।
पीर सही जाती नहीं, जर के बाद जमीन।।



आतंकी से भी अधिक, निरहू-घुरहू रुष्ट |
बड़े नोट बदले गए, क्यों रे मोदी दुष्ट ||



धक्के खा लो बैंक में, पत्थर से तो नर्म।
तुम भी सैनिक देश के, करो राष्ट्र हित कर्म।।

10 November, 2016

भागा भ्रष्टाचार, पास अच्छे दिन फटके-


टके टके पर टकटकी, खटके नोट हजार।
बेखटके निर्धन डटे, खाय अमीरी खार।
खाय अमीरी खार, बुखारी बदन गरम है।
थमता नक्सलवाद, हुआ आतंक नरम है।
भागा भ्रष्टाचार, पास अच्छे दिन फटके।
लटके झटके देख, सुधरते जायें भटके ।।

07 November, 2016

सबके बदले मौज, किन्तु ये नेता करते-


करते काम गरीब तो, शोषण करे अमीर ।
दोनों की रक्षा करे, क्रमश: सैनिक वीर।
क्रमश: सैनिक वीर, इन्हें पाले करदाता।
देख घुमक्कड़-ठाठ, पिये दारू मदमाता।
बैंकर कसे नकेल, वकीलों से ये डरते।
सबके बदले मौज, किन्तु ये नेता करते।।

25 October, 2016

पिता मुलायम हाथ से, आज खुजाता माथ-

(1)

भूसा पर क्यूँ लीपता, पता नहीं हे नाथ।
पिता मुलायम हाथ से, आज खुजाता माथ।
आज खुजाता माथ, चला जाता है बेटा।
सत्ता का संघर्ष, वंश सम्पूर्ण लपेटा।
बड़ा हुआ यह नाट्य, सूत्रधारी अब रूसा।
दर्शक बनते पात्र, सुलगता गोबर भूसा।।

(2)

चरवाहों के स्वांग से, चढ़ा साधु को रोष।
मूसल पैदा होयगा, किया साधु उद्घोष।
किया साधु उद्घोष, समय पर उपजा मूसल।
उपजा पूत कमाल, हुई फिर मारक हलचल।
मारकाट मच जाय, वंश मिट जाये रविकर।
चारा बिना प्रदेश, मरुस्थल करते चर चर।।