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04 December, 2012

'रूप' - 'भारती' नेक, बैठ गंगा के तट पर

चालिसवीं वर्षगाँठ पर शुभकामनायें -

 
चालिस-चालिस शेर के, दो मन होते एक ।
अमर रहे यह युगल-निधि, रूप भारती नेक ।
 
रूप भारती नेक, बैठ  गंगा के तट पर ।
कुल-संकुल इक संग, दमकता चेहरा रविकर ।
 
वर्षगाँठ  कामना,  रहे शुभ प्यार निखालिस ।
स्वस्थ देह मन मुदित, चालिसा रचिए चालिस ।।



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 Rose





5 comments:

  1. क्या बात है दोस्त समा बाँध दिया गांठ वर्ष चालीसा का .

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  2. चालीसवीं वर्षगांठ की चित्रात्मक प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद

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  3. यहीं से हमारी भी बधाई पहुँचे..

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  4. aap dono ko bahut bahut badhayi !

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  5. बहुत बधाइयाँ....
    सादर।

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