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01 January, 2013

हिम्मत जुटा जटायु, बजा दे घंटी रविकर -



दुर्जन निश्चर पोच अघ, फेंकें काया नोच ।
विकृतियाँ जब जींस में, कैसे बदले सोच ?

कैसे बदले सोच, नहीं संकोच करे हैं ।
है क़ानूनी लोच, तनिक भी नहीं डरे हैं ।

हिम्मत जुटा जटायु, बजा दे घंटी रविकर ।
करके रावण दहन, मिटा दे दुर्जन निश्चर ।।



नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी-

 दाम, दामिनी दमन, दम, दंगा दपु दामाद ।
दरबारी दरवेश दुर, दुर्जन जिंदाबाद ।
दुर्जन जिंदाबाद, अनर्गल भाषण-बाजी ।
कर शब्दों से रेप, स्वयंभू बनते गाजी ।
बारह, बारह बजा, बीतती जाय यामिनी । 
नए वर्ष में शपथ, मरे नहीं मित्र दामिनी ।। 

मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल- रविकर

विनम्र श्रद्धांजलि 
ताड़ो नीयत दुष्ट की,  पहचानो पशु-व्याल |
मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल |


रखो अपेक्षित ख्याल, पिता पति पुत्र सरीखे
 बनकर सच्चा मित्र,
हिफाजत करना सीखे ||


एक घरी का स्वार्थ, जिन्दगी नहीं उजाड़ो |
जोखिम चलो बराय, मुसीबत झटपट ताड़ो ||



12 comments:

  1. इस जटायू के बस का नहीं है घंटी बजाना , ये सूर्पनखा माई के चरणों में भी ढंग से लोट सके तो वही काफी !

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  2. नव वर्ष की शुभकामनाएँ !!

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  3. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 05/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  4. ‘चिन्तन-मनन’ करें हम थोड़ा, देखें कुछ टटोल कर-
    ‘क्या खोया,क्या पाया हमने’, बीत गये इस वर्ष में|

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  5. बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक अभिव्यक्ति आपको सहपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !शुभकामना देती ”शालिनी”मंगलकारी हो जन जन को .-2013

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  6. यथार्थ का रूप हैं सभी बंध ...
    २०१३ आपको शुभ हो ... मंगलमय हो ...

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  7. विनम्र श्रद्धांजलि
    ताड़ो नीयत दुष्ट की, पहचानो पशु-व्याल |
    मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल |

    रखो अपेक्षित ख्याल, पिता पति पुत्र सरीखे।
    बनकर सच्चा मित्र, हिफाजत करना सीखे ||

    एक घरी का स्वार्थ, जिन्दगी नहीं उजाड़ो |
    जोखिम चलो बराय, मुसीबत झटपट ताड़ो ||

    भावपूर्ण काव्यांजलि में एक सुमन हमा रा भी मिला लो .आभार आपकी ताज़ा टिपण्णी का .

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  8. सुन्दर भाव सुन्दर प्रस्तुति , कैसे बदले सोच, नहीं संकोच करे हैं ।
    है क़ानूनी लोच, तनिक भी नहीं डरे हैं ।

    हिम्मत जुटा जटायु, बजा दे घंटी रविकर ।
    करके रावण दहन, मिटा दे दुर्जन निश्चर ।।--- ताड़ो नीयत दुष्ट की, पहचानो पशु-व्याल |
    मित्र-सेक्स विपरीत गर, रखो अपेक्षित ख्याल |

    रखो अपेक्षित ख्याल, पिता पति पुत्र सरीखे।
    बनकर सच्चा मित्र, हिफाजत करना सीखे ||

    एक घरी का स्वार्थ, जिन्दगी नहीं उजाड़ो |
    जोखिम चलो बराय, मुसीबत झटपट ताड़ो || न्यू पोस्ट KHICHADI

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  9. बहुत ही बढ़िया सर!


    सादर

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  10. शुक्रिया भाई साहब आपकी सद्य टिपण्णी का आशीष का जिसकी भांजे/भतीजे को बहुत ज़रुरत है .

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