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29 January, 2013

गौरी छिब्बर खान, किरण जस गोली दागा-


रहम करो रहमान पर, रब का बन्दा नेक ।
बादशाह की रोटियां, रहा आग पर सेंक ।
रहा आग पर सेंक, बिचारा बड़ा अभागा ।
गौरी छिब्बर खान, किरण जस गोली दागा ।
 सौ करोड़ का प्यार, कलंकित आज करे है
  हाफिज तो मक्कार, हिफाजत के नखरे हैं ।।

 भुट्टो को फाँसी मिली, बेनजीर का क़त्ल |
ख्वाहिश तेरी गर दिली, नहीं लगाओ अक्ल |
नहीं लगाओ अक्ल, शक्ल के बड़े पुजारी |
जाय बसों तुम पाक, भरे हैं वहाँ फरारी |
कुछ दिन लोगे झेल, किन्तु जब जाओ हूरे |
आना वापस भाग, अधूरे करने पूरे  ||
  
  ओ-वेशी मत बकबका, मुहाजिरों को देख |
सर्वाइव कैसे करें, शिया मियां कुल शेख |
शिया मियां कुल शेख, पाक की हालत बदतर |
इत मुस्लिम खुशहाल, किसी से हैं क्या कमतर ?
विश्लेषण अनुसार, हिन्दु है बड़ा हितैषी  |
पुरखे जाते बाट, बाट मत अब ओबेशी ||



8 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (30-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  2. उत्कृष्ट व्यगात्मक एवं तथ्ययुक्त प्रस्तुति कृतघन के मुह पे करार तमाचा , ...

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  3. बहुत ही तर्कसंगत और सार्थक प्रस्तुती,आभार।

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  4. ओ-वेशी मत बकबका, मुहाजिरों को देख |
    सर्वाइव कैसे करें, शिया मियां कुल शेख |
    शिया मियां कुल शेख, पाक की हालत बदतर |
    इत मुस्लिम खुशहाल, किसी से हैं क्या कमतर ?
    विश्लेषण अनुसार, हिन्दु है बड़ा हितैषी |
    पुरखे जाते बाट, बाट मत अब ओबेशी ||

    बढ़िया प्रस्तुति बढ़िया व्यंग्य फटकार परिहास सब कुछ एक साथ .आभार .

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  5. वाह ! सटीक कटाक्ष..

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