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31 August, 2013

नहीं कहीं भी लगता नारा । पी एम चुप्पा चोर हमारा ॥

नहीं कहीं भी लगता नारा । 
पी एम चुप्पा चोर हमारा ॥ 

चोर चुहाड़ कमीना बोले  । 
राज राज का बाहर खोले॥  

सत्ता सांसद यहाँ खरीदें  । 
रखे तभी जिन्दा उम्मीदें ॥ 

नौ दिन चले अढ़ाई माइल । 
होय काँख से गायब फ़ाइल ॥  

जहाँ निकम्मे हैं अधिकारी । 
प्रवचनकर्ता तक व्यभिचारी ॥ 

जन गन मन मुद्रा में मस्ती । 
होती जाती मुद्रा सस्ती ।। 





2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार -01/09/2013 को
    चोर नहीं चोरों के सरदार हैं पीएम ! हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः10 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  2. गुजंलक हुई सभी देशव्‍यापी समस्‍याओं पर कितना पैना व्‍यंग्‍य वार किया है, विचारणीय।

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