Follow by Email

31 August, 2013

पाता पोती दुष्ट, और अज'माता ओरल-

रल-मिल दुर्जन लूटते, गैंग रेप कहलाय । 
हत्या कर के भी यहाँ, नाबालिग बच जाय । 

नाबालिग बच जाय, प्रवंचक साधु कहानी । 
नहीं करे वह रेप, मुखर-मुख की क्या सानी । 

छल बल *आशर बाढ़, मची काया में हलचल । 
पाता पोती दुष्ट, और अज'माता ओरल ॥ 
*राक्षस 


खड़ी निकाले खीस, रेप वह भी तो झेले-


टला फैसला दस दफा, लगी दफाएँ बीस |
अंध-न्याय की देवि ही, खड़ी निकाले खीस |

खड़ी निकाले खीस, रेप वह भी तो झेले |
न्याय मरे प्रत्यक्ष, कोर्ट के सहे झमेले |

नाबालिग को छूट, बढ़ाए विकट हौसला |
और बढ़ेंगे रेप, अगर यूँ टला फैसला ||

11 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [02.09.2013]
    चर्चामंच 1356 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

    ReplyDelete
  2. हत्या कर के भी यहाँ, नाबालिग बच जाय ।

    वाह! यह भारतीय कानून की विसंगति ही है .

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर,लाजवाब प्रस्तुति,सादर .

    ReplyDelete
  4. बहुत दुखित किया है इस न्‍याय व्‍यवस्‍था ने। लेकिन अभी जनमानस का प्रतिकार बाकी है।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर एक कुंडली निराशा राम पर भी हो जाए .

    ReplyDelete
  6. मित्र !यह भी अजाब पहेली है !

    ReplyDelete
  7. क्या न्याय है, यदि यह न्याय है तो अन्याय क्या होगा ।

    ReplyDelete