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04 August, 2013

अरुण निगम जी को जन्म दिवस की शुभकामनायें-


 

 भैया जी शुभकामना, काम मना पर आज |
जन्म दिवस लेते मना, रविकर दे आवाज |

रविकर दे आवाज, कहीं कविता हो जाती |
मित्र मंडली साज, साँझ होती मदमाती |

दुर्मिल मदिरा गीत, सभी में दिखें सवैया |
रहो स्वस्थ सानन्द, मगन मन हरदम भैया ||

  1. पाई है शुभकामना , हृदय कहे आभार
    बनी रहे यह मित्रता , बना रहे यह प्यार
    बना रहे यह प्यार,रहे जब तक यह काया
    हरदम ही सिरमौर , रहे मित्रों का साया
    कुण्डलिया हो देह , छंद साँसों में भाई
    दोहे हों दो हाथ , बिछे अंतस् चौपाई ||


    सादर......
    1. बहुत बढ़िया-
      अंतिम दो पंक्तियों ने तो लूट लिया भाई जी-
      सादर

      कुण्डलिया हों देह सी, तंत्र तथा हठयोग |
      सूक्ष्म मूल-आधार की, करके शक्ति प्रयोग |
      करके शक्ति प्रयोग, लोक कल्याण कीजिये |
      दोहे दो दो हाथ, हमेशा दान दीजिये |
      अन्तर का उन्माद, रचे चौपाई बढ़िया-
      बहुत बहुत आभार, किया जागृत कुण्डलिया |

16 comments:

  1. अरुण जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

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  2. हार्दिक शुभकामनाएं मेरी ओर से भी।

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  3. हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  4. हार्दिक शुभकामनाएं जी

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  5. हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  6. Aapki geet bhari shubh kamnaon ke sath Arun ji ko hamari bhee shubh kamnaen.

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  7. भैया जी शुभकामना, काम मना पर आज |
    जन्म दिवस लेते मना, रविकर दे आवाज |

    रविकर दे आवाज, कहीं कविता हो जाती |
    मित्र मंडली साज, साँझ होती मदमाती |

    दुर्मिल मदिरा गीत, सभी में दिखें सवैया |
    रहो स्वस्थ सानन्द, मगन मन हरदम भैया ||
    बढ़िया जन्मांजलि .सुन्दर मनोहर .

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  8. ॐ शांति। दिल कहे बाबा तेरा शुक्रिया।

    मुबारक जन्म दिन मुबाराक मित्रता और मित्रता दिवस। ॐ शान्ति। ऐसे ही रचनात्मक बने रहो खिलते रहो ब्लॉग गगन पर।

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  9. ढेरों शुभकामनायें

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  10. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुतिचर्चा मंच पर ।।

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  11. बहुत सुन्दर तौफा है दोस्त को दोस्त का .ॐ शान्ति

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  12. पाई है शुभकामना , हृदय कहे आभार
    बनी रहे यह मित्रता , बना रहे यह प्यार
    बना रहे यह प्यार,रहे जब तक यह काया
    हरदम ही सिरमौर , रहे मित्रों का साया
    कुण्डलिया हो देह , छंद साँसों में भाई
    दोहे हों दो हाथ , बिछे अंतस् चौपाई ||

    सादर......

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    Replies
    1. बहुत बढ़िया-
      अंतिम दो पंक्तियों ने तो लूट लिया भाई जी-
      सादर

      कुण्डलिया हों देह सी, तंत्र तथा हठयोग |
      सूक्ष्म मूल-आधार की, करके शक्ति प्रयोग |
      करके शक्ति प्रयोग, लोक कल्याण कीजिये |
      दोहे दो दो हाथ, हमेशा दान दीजिये |
      अन्तर का उन्माद, रचे चौपाई बढ़िया-
      बहुत बहुत आभार, किया जागृत कुण्डलिया |

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  13. बहुत सुंदर !
    अरुण जी को उनके जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ !!

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