Follow by Email

04 February, 2014

भ्रष्टाचारी मर रहे, जियें झूठ के वीर-

(धनबाद आ गया हूँ-सादर)

भ्रष्टाचारी मर रहे, जियें झूठ के वीर |
क़त्ल कलम करने लगी, जिला रही शमशीर |

जिला रही शमशीर, चोर-कुल जिला-बदर हो |
जो मारे सो मीर, शोर भी अब दमभर हो |

हुआ अराजक राज, करे झूठा मक्कारी |
झूठ-मूठ आह्लाद, मिटा हर भ्रष्टाचारी ||

6 comments:

  1. यह आरी बड़ी तेज चल रही है।

    ReplyDelete
  2. सवागत है !
    कमी खल रही थी !
    सुंदर !

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक कल चर्चा मंच पर है
    आभार

    ReplyDelete
  4. बहुत सटीक बहुत सुन्दर प्रासंगिक चित्रण .

    भ्रष्टाचारी मर रहे, जियें झूठ के वीर |
    क़त्ल कलम करने लगी, जिला रही शमशीर |

    जिला रही शमशीर, चोर-कुल जिला-बदर हो |
    जो मारे सो मीर, शोर भी अब दमभर हो |

    हुआ अराजक राज, करे झूठा मक्कारी |
    झूठ-मूठ आह्लाद, मिटा हर भ्रष्टाचारी ||

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete