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09 October, 2014

बाल-पहेली -

रोटी खाई घास की, नहीं झुकाया माथ।
चबवाया नाकों चने, ले भीलों का साथ ।
बोलो बच्चों क्यों चुपचाप । 

चीर बघनखे से चखे, वीर जीत का स्वाद । 
रखे हिंदवी राज को, सदियों तक आबाद ॥ 
उत्तर दो या हारो बाजी । 

बाँध पुत्र को पीठ पर, पड़ी शत्रु पर टूट ।
एक अकेली क्या करे, हाय आपसी फूट । 
जरा नाम तो बोलो भाई । 

नजरबन्द क्योंकर रहें, पहुँच गए जापान |
फौज बना के जंग का, कर देते ऐलान ||
उत्तर दे करिये जयघोष |

कौआ कौआता रहा, कोयल चलती चाल |
अपने रख घोसले में, उसके गई निकाल |
उत्तर दो या खाओ डंडे ।

आसमान में दूर तक, तक तक हारा जंतु । 
पानी तो पूरा पड़ा, प्यासा मरा परन्तु । 
बूझ पहेली आज शाम तक । 

चलती दीखें पंक्ति में, चीनी उन्हें पसन्द। 
माने कुल संकुल नियम, तुम भी सीखो चन्द । 
उत्तर देकर करिये पी टी । 
Shivaji Maharaj HD Photos Wallpaperझांसी की रानी की एक पेंटिंग,

11 comments:

  1. बहुत बढ़िया बाल पहेलियाँ ....

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  2. आपकी लिखी रचना शनिवार 11 अक्टूबर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  3. निराला अंदाज़ , मनभावन हमेशा की तरह !!
    आभार भाई !!

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  4. अच्छी पहेलियाँ हैं। बच्चों के बीच रखूँगा।
    इस मज़ेदार सामग्री को उपलब्ध कराने के लिए आदरणीय को आभार।

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  5. आपकी ये रचना चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.in/ पर चर्चा हेतू 11 अक्टूबर को प्रस्तुत की जाएगी। आप भी आइए।
    स्वयं शून्य

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  6. बाँध पुत्र को पीठ पर, पड़ी शत्रु पर टूट ।
    एक अकेली क्या करे, हाय आपसी फूट ।
    जरा नाम तो बोलो भाई ।

    महारानी लक्ष्मीबाई -
    लक्ष्मी थी वो दुर्गा थी ,वो स्वयं वीरता की अवतार

    देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार .

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  7. बहुत सुंदर पहेलियाँ

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  8. सुंदर बाल पहेलियाँ

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  9. Bahut hi adbhut paheliyaan bahut khoob !!

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  10. वाह ... दमा दम ... लाजवाब पहिलियाँ ....

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